Supreme Court News: भारत के संविधान से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस मामले को लेकर, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि ये शब्द भारतीय संविधान का अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे और इन्हें हटाने का कोई भी प्रयास असंवैधानिक होगा। इस फैसले ने भारतीय संविधान की मौलिक विशेषताओं को बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है।
Supreme Court News: शब्दों की हटाने को लेकर क्यों हो रही मांग ?
बता दें कि, यह मामला तब सामने आया जब कुछ याचिकाकर्ताओं ने संविधान से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने की मांग की थी। इस मामले को लेकर उनका तर्क यह था कि ये शब्द संविधान के मूल उद्देश्य से बिल्कुल भी मेल नहीं खता है साथ ही भारतीय संस्कृति और समाज के वास्तविक स्वरूप को परिभाषित नहीं करता। इस मामले को लेकर याचिकाकर्ताओं का कहना था कि भारत एक विविधतापूर्ण समाज है और इसके संविधान में इन शब्दों का समावेश नहीं किया जाना चाहिए था।
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने लिया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय संविधान में ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन शब्दों को संविधान में शामिल करने का उद्देश्य भारत के संविधान को एक ऐसी दिशा में प्रकट करना था, जो समता, न्याय और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना को बढ़ावा दे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय भारतीय समाज की विविधता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए दिया। कोर्ट ने यह माना कि समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता भारतीय राजनीति और समाज का अभिन्न हिस्सा हैं, और इन्हें हटाने से भारतीय लोकतंत्र की बुनियादी संरचना पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
Supreme Court News: क्या संविधान में किया जाएगा बदलाव ?
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि संविधान में कोई बदलाव करना है, तो इसके लिए संसद की मंजूरी आवश्यक है। संविधान के किसी भी हिस्से को बदलने के लिए विशेष प्रक्रिया का पालन किया जाता है, और इसे केवल संसद द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से ही किया जा सकता है। यह फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की स्थिरता और उसकी मूल धारा को बनाए रखने की जरूरत को स्पष्ट किया।
Supreme Court News: समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द का महत्व
‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द भारतीय संविधान के प्रास्ताविक भाग में शामिल हैं और ये देश की राजनीतिक और सामाजिक संरचना को परिभाषित करते हैं। ‘समाजवादी’ शब्द का अर्थ है कि राज्य सभी नागरिकों के बीच समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा, जबकि ‘धर्मनिरपेक्ष’ का मतलब है कि भारतीय राज्य किसी भी धर्म के प्रति पक्षपाती नहीं होगा और सभी धर्मों का समान सम्मान करेगा।
Supreme Court News: न्यायिक और राजनीतिक संदर्भ
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने संविधान के मूल सिद्धांतों को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह निर्णय न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की ताकत और उसकी विविधता की रक्षा करता है। यह निर्णय यह भी सिद्ध करता है कि भारतीय न्यायपालिका संविधान की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रयास को असंवैधानिक घोषित करेगी, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास करता है।
इस फैसले से यह भी संदेश जाता है कि भारतीय संविधान को उसकी मूल भावना और उद्देश्य के अनुसार लागू किया जाएगा और उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव किसी विशेष हित के तहत नहीं किया जाएगा।
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