MP IAS Transfer: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए 15 IAS अधिकारियों का तबादला किया है। इस सूची में जिलों के कलेक्टर, विभागीय सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इन तबादलों को आगामी चुनावों के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है।
सरकार ने सचिवालय में तैनात कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी है। अभिषेक सिंह, गृह विभाग में संयुक्त सचिव का पद संभाल रहे थे, अब उन्हें परिवहन विभाग में विशेष सचिव बनाया गया है। सुमित अग्रवाल, जो ऊर्जा विभाग में पदस्थ थे, अब कृषि विभाग में अपनी सेवाएं देंगे।
MP IAS Transfer: कई जिलों में कलेक्टरों का तबादला
राज्य के कई जिलों में कलेक्टरों का तबादला किया गया है। यह कदम चुनावी तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। नरसिंहपुर के कलेक्टर रोहित गुप्ता को अब सीहोर का कलेक्टर नियुक्त किया गया है। सतना कलेक्टर नीरज कुमार सिंह को ग्वालियर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है। धार कलेक्टर प्रीति सिंह को राज्य महिला आयोग में सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है।
इन तबादलों को चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सख्त और अनुभवी अधिकारियों को चुनावी दृष्टिकोण से अहम जिलों में तैनात किया गया है। राघवेंद्र सिंह, जो रीवा में ADM थे, अब सागर के नए DM बनाए गए हैं। चुनावी तैयारियों के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
MP IAS Transfer: डॉ. मनीष कुमार निभाएंगे अब नई भूमिका
सरकार ने परिवहन, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी बदलाव किए हैं। डॉ. मनीष कुमार, जो ऊर्जा विभाग में सचिव थे, अब स्वास्थ्य विभाग में नई भूमिका निभाएंगे। अमित वर्मा, परिवहन विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में तैनात किए गए हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तबादलों के माध्यम से एक स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनावों में प्रशासनिक कार्य निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए। इन फेरबदल के जरिए राज्य में विकास कार्यों को गति देने और सुशासन सुनिश्चित करने की मंशा जताई गई है।
MP IAS Transfer: विपक्ष ने इन तबादलों पर सवाल उठाए कई सवाल
विपक्ष ने इन तबादलों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि यह कदम चुनावी धांधली की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने राजनीतिक लाभ के लिए अधिकारियों का उपयोग करना चाहती है।
तबादले के बाद नए पदों पर तैनात अधिकारियों के सामने चुनावी माहौल में निष्पक्षता बनाए रखने और विकास कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने की बड़ी चुनौती होगी। इन फेरबदल को मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और चुनावी तैयारियों में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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